आरोप-प्रत्यारोपों, के बीच जनता के मुद्दे छूटे, भाजपा-कांग्रेस एक-दूसरे को ठहरा रहे गद्दार ।

आरोप-प्रत्यारोपों, के बीच जनता के मुद्दे छूटे, भाजपा-कांग्रेस एक-दूसरे को ठहरा रहे गद्दार ।

उपचुनाव में पार्टियां स्थानीय मुद्दों को तरजीह नहीं दे रहीं, उनके पास गद्दारी और वफादारी जैसी बातों के अलावा कुछ नहीं

भाजपा की सभाओं में सिर्फ सिंधिया के अपमान की बातें जबकि कांग्रेस को कमलनाथ सरकार गिरने का दर्द ।

सीतापुर कॉरिडोर जिसपर लगभग 200 करोड़ खर्च हो गए। गवालियर शहर को मेट्रोपोलिटन सिटी में शामिल करने का मुद्दा हो या मुरैना की कैलारस शुगर मिल को चालू कराने और चंबल वाटर प्रोजेक्ट की विस्तृत रूपरेखा तय करने का मामला। भांडेर में सोलर पाॅवर प्लांट और भिंड के मेहगांव-गोहद में पीने का पानी व सिंचाई संकट, शिवपुरी के करैरा में सोनचिरैया अभयारण्य व करैरा नगर की जलावर्धन योजना, पोहरी में अजवाइन प्रोसेसिंग यूनिट जैसे बड़े मुद्दों को भी पूरी तरह भुला दिया गया है।


बेरोजगारी स्वास्थ्य बिजली पानी जैसे स्थानीय मुद्दे गायब है ।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने अभी तक जितनी भी जनसभाएं और कार्यकर्ताओं की बैठक ली, उनमें सिंधिया व उनके समर्थक मंत्री-विधायकों का कांग्रेस सरकार में अपमान का मुद्दा छाया रहा।


उधर, कांग्रेस नेता हर सभा में आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा ने कांग्रेस की चुनी हुई कमलनाथ सरकार को खरीद-फरोख्त कर गिराया। हम तो वादे पूरे कर रहे थे लेकिन भाजपा ने धनबल से सरकार गिरा दी।
5 जिलों के इन मुद्दों पर कोई भी राजनीतिक दल नहीं कर रहा चर्चा।


मुरैनाशुगर मिल : पिछले दो चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने कैलारस शुगर मिल के नाम पर जनता से वोट बटोरे लेकिन उपचुनाव में भाजपा हो या कांग्रेस, किसी भी पार्टी का प्रत्याशी या उनका नेता इस पर चर्चा करने को भी तैयार नहीं हैं जबकि कैलारस शुगर मिल जौरा, कैलारस व सबलगढ़ के लिए सबसे बड़ा विकास का मुद्दा है।


सीतापुर कॉरिडोर : 200 करोड़ से 2 साल पहले तैयार सीतापुर कॉरिडोर में आज तक एक भी उद्योग नहीं आया। जिले के युवा बेरोजगार हैं। उद्योग लगें तो उन्हें रोजगार मिले लेकिन इस पर अब कोई भी दल चर्चा नहीं कर रहा।


भिंडपानी : मेहगांव क्षेत्र के गांवों में खारे पानी की बड़ी समस्या है। सिंचाई के लिए भी किसानों को पानी नहीं मिलता।कॉलेज : गोहद में एक भी कॉलेज नहीं है। यहां कन्या कॉलेज की मांग लंबे समय से की जा रही है। गोरमी और रौन क्षेत्र में कॉलेज की मांग भी लंबे समय से की जा रही है।


शिवपुरीअभयारण्य : करैरा क्षेत्र में सोनचिरैया अभयारण्य पर पिछले चुनावों में चर्चा होती थी। अभ्यारण्य से प्रभावित गांव के ग्रामीण परेशान हैं। करैरा में जलावर्धन योजना का शिलान्यास बाबूलाल गौर के समय हुआ था। पूरा पैसा खर्च होने के बाद भी जनता को पानी नहीं मिला रहा।प्रोसेसिंग यूनिट: पोहरी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में अजवाइन की पैदावार हाेती है। यहां प्रोसेसिंग यूनिट की मांग लंबे समय से है। इसी क्षेत्र के बैराड़ में कॉलेज के लिए जमीन तो मंजूर है, लेकिन उस पर अतिक्रमण है। कॉलेज नहीं खुलने से छात्र परेशान हैं।


दतियागैस प्लांट और पानी : भांडेर क्षेत्र में गैस पॉवर प्लांट बनना है। लोगों ने इसको लेकर संघर्ष भी किया लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। यहां फसलों की सिंचाई का संकट भी है। हालांकि बांध भर जाने से पिछले दो साल से पानी मिल रहा है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। इसके अलावा कई गांवों में बिजली का बड़ा संकट है।


ग्वालियरमेट्रोपोलिटन सिटी : कमलनाथ सरकार में भोपाल, इंदौर के साथ ग्वालियर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने की घोषणा हुई थी। प्रशासनिक टीम ने बैंगलुरु जाकर सर्वे भी किया था लेकिन कांग्रेस सरकार जाने के बाद इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं बढ़ी। उपचुनाव में भाजपा या कांग्रेस के नेता कोई भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे।
स्वर्ण रेखा नदी : हनुमान बांध से जलालपुर तक स्वर्ण रेखा नदी पर कमलनाथ सरकार के वक्त एलिवेटेड रोड प्रस्तावित की गई थी। 22 अगस्त को ग्वालियर में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की मांग पर इसे पूरा कराने की घोषणा की थी। उपचुनाव में इस पर कोई बात नहीं हो रही।


चंबल प्रोजेक्ट : चंबल नदी से ग्वालियर तक पानी लाने के लिए 2018 में एनसीआर बोर्ड ने लोन की स्वीकृति दे दी थी। लेकिन वाइल्ड लाइफ व अन्य विभागों की एनओसी न आ पाने के कारण इस पर काम शुरू नहीं हो सका। कोई भी पार्टी इस मुद्दे को लेकर बात नहीं कर रही है।

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