जीवाजी विश्वविद्यालय के रिजल्ट तैयार करेगी नई कंपनी, जारी नहीं हुए 32 परीक्षाओं के रिजल्ट

जीवाजी विश्वविद्यालय के रिजल्ट तैयार करेगी नई कंपनी, जारी नहीं हुए 32 परीक्षाओं के रिजल्ट

जीवाजी विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में रिजल्ट बनाने वाली नागपुर की कंपनी (माइक्रो प्रो लिमिटेड) को बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला आखिरकार ले ही लिया गया। अब नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। जब तक नई कंपनी काम नहीं संभाल लेती, तब तक नागपुर की कंपनी ही रिजल्ट बनाने का काम करेगी। फिलहाल इस कंपनी पर 32 परीक्षाओं के रिजल्ट अटके हुए हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय की परीक्षा का शिड्यूल बिगड़ गया है। न समय पर रिजल्ट आ रहे हैं न ही छात्रों को मार्कशीट मिल रही हैं। जो रिजल्ट व मार्कशीट आईं, उनमें गलतियां थीं। इस कारण आए दिन छात्र जेयू में हंगामा कर रहे हैं। छात्रों को तालाबंदी तक करनी पड़ी। स्थिति ज्यादा भयाभय होती जा रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए सोमवार को जेयू ने विशेष कार्यपरिषदक की बैठक बुलाई।

इस बैठक में रिजल्ट बनाने वाली नागपुर की कंपनी के भविष्य पर चर्चा की गई। बैठक में ऐसे बिंदु सामने आए कि ठेका देने में गड़बड़ी साफ दिख रही थी। चर्चा के बाद तय किया गया कि नई कपनी के चयन के लिए टेंडर जारी किया जाए।

टेंडर जेयू खुद तैयार न करते हुए उन एजेंसियों से तैयार कराए, जो दूसरे विश्वविद्यालय के लिए तैयार करती हैं। साथ ही फैसला लिया गया कि नागपुर की कंपनी को नया काम नहीं दिया जाएगा। जो पुराने रिजल्ट पेंडिंग हैं, वही इसी कंपनी से घोषित कराए जाएं। करीब 32 रिजल्ट कंपनी के पास अटके हैं। बैठक में कुलपति, कुलसचिव सहित कार्यपरिषद सदस्य मौजूद थे।

कंप्यूटर प्रोग्रामर के हस्ताक्षर से कर दिया 41 लाख का भुगतान

-माइक्रो प्रो लिमिटेड नागपुर ने दिसंबर 2018 में काम संभाला था। इस कंपनी को एडवांस में 41 लाख 31 हजार रुपए का भुगतान किया गया। एडवांस भुगतान के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का रिकॉर्ड ईसी की बैठक में तलब किया गया। बैठक में रिकॉर्ड रखा गया तो सामने आया कि कंप्यूटर प्रोग्रामर संजय बिरथरिया के हस्ताक्षर से एक फाइल आगे बढ़ाई गई थी। इसी के आधार पर उसे भुगतान कर दिया। फाइल पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे।

लैब की निरीक्षण रिपोर्ट भी नहीं ला सके

माइक्रो प्रो लिमिटेड नागपुर को ठेका देने से पहले तीन सदस्यीय कमेटी कंपनी को देखने गई थी। कंपनी का काम देखने के बाद तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जेयू को दी थी। इस रिपोर्ट को ईसी की बैठक में मांगा गया, लेकिन रिपोर्ट पेश नहीं कर पाए।

– इसी मेंबर रिपोर्ट में देखना चाहते थे कि वे क्या देखकर आए थे, जिसके आधार पर कंपनी को ठेका दिया गया।

– बैठक में सवाल किया गया कि जो काम 18 रुपए में हो रहा था, उसको कराने में 80 से 100 रुपए क्यों खर्च किए गए। रेट किस आधार पर बढ़ाए गए। यह भी जानकारी बैठक में अधिकारी पेश नहीं कर पाए।

– विश्वविद्यालय मैनेजमेंट सिस्टम के तहत नागपुर की कंपनी को 4 करोड़ 50 लाख रुपए में टेंडर दिया गया था, जिसमें 3.50 करोड़ रुपए परीक्षा कार्य के थे।

इस कंपनी की वजह से बिगड़ गई थी व्यवस्थाएं

– समय पर ओएमआर शीट नहीं दिए जाने की वजह से कॉपियों का मूल्यांकन नहीं हो सका है।

-हर परीक्षा के रिजल्ट को तीन से चार महीने लेट कर दिया गया। इससे छात्र प्रवेश लेने से वंचित रह गए थे।

– मार्कशीटों में गलत अंक चढ़ा दिए। रिजल्ट में छात्र को अनुपस्थित दिखाया गया।

मूल्यांकन कार्य की दरों में किया सुधार

कार्यपरिषद ने समन्वय समिति की उन दरों को अनुमोदित कर दिया, जिसमें स्नातक की कॉपी के मूल्यांकन के लिए 15 रुपए व स्नातकोत्तर की कॉपी के मूल्यांकन के लिए 20 रुपए निर्धारित हैं। अभी तक जेयू 5 रुपए ज्यादा भुगतान कर रहा था, जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। समन्वय समिति की दरों को बैठक में रखा गया। उन्हें स्वीकार किया गया।

इनका कहना है

– नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस प्रक्रिया को दो से तीन दिन में पूरा कर लेंगे। नागपुर की कंपनी से सिर्फ पुराना कार्य ही पूरा कराया जाएगा। आगामी जो परीक्षाएं होंगी, उसका कार्य नई कंपनी करेगी। 

आईके मंसूरी, कुलसचिव जेयू

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