ज्योतिरादित्य सिंधिया की सियासी ‘सल्तनत’, पर कांग्रेस का गेमओवर का ‘प्लान’

ज्योतिरादित्य सिंधिया की सियासी ‘सल्तनत’, पर कांग्रेस का गेमओवर का ‘प्लान’

ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने की पूरी तैयारी, कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं को लगाया।
4 सीट हारे तो गढ़ में हो जाएगा गेमओवर।
इस उपचुनाव में 28 में से सबसे अहम ग्वालियर और गुना जिले की चार सीटें हैं।

भोपाल. गुना और ग्वालियर ये दोनों ही सिंधिया परिवार के परंपरागत संसदीय क्षेत्र रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया पहले ग्वालियर सीट से सांसद चुने गए थे। बाद में भाजपा नेता जयभान सिंह पवैया के मजबूती से उभरने के कारण उन्हें ग्वालियर छोडऩा पड़ा। फिर वे गुना आ गए। माधवराव सिंधिया के निधन के बाद जब से ज्योतिरादित्य ने सियासत में कदम रखा है, तब से गुना संसदीय सीट को राजनीतिक विरासत माना। अब कांग्रेस का गेमप्लान इसी सीट के कोर एरिया में सिंधिया की सल्तनत में सेंध लगाकर ध्वस्त करने का है। इसके तहत कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं को इन सीटों पर उतारा है। एक-एक बूथ की मॉनीटरिंग की जा रही है।

गुना जिला: दिग्विजय रियासत के लिए बड़ा मौका, जयवर्धन जुटे
गुना की जंग में सिंधिया सल्तनत और दिग्विजय रियासत बड़ा फैक्टर है। गुना की चार में से तीन सीटें अभी सिंधिया समर्थकों से बाहर हैं। इनमें एक सीट पर दिग्विजय के पुत्र जयवर्धन सिंह और एक पर छोटे भाई लक्ष्मण सिंह काबिज हैं। एक सीट पर भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव हैं। बमोरी सीट पर सिंधिया समर्थक मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस का गेमप्लान अब गुना में सिसौदिया की हार पर फोकस करना है। सिसौदिया यदि हार जाते हैं तो पार्टी स्तर पर भाजपा और कांग्रेस की दो-दो सीटें हो जाएंगी। लेकिन, सिसौदिया की हार सिंधिया के लिए गुना में गेमओवर जैसी होगी।

यहां दिग्विजय के पुत्र जयवर्धन सिंह जुटे हुए हैं। हर बूथ तक उनकी पहुंच है। एक बड़ा फैक्टर पूर्व मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल को कांग्रेस प्रत्याशी बनाना है। सिसौदिया पिछली बार 27 हजार वोट से जीते थे, जबकि अग्रवाल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 28 हजार से ज्यादा वोट ले गए थे। तब, भाजपा ने अग्रवाल को टिकट नहीं दिया था। वे निर्दलीय उतरे थे। इस बार कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर मैदान में मुकाबला कांटे का कर दिया है।

गुना सीट से मिलते हैं कम वोट
हालांकि सिंधिया को हमेशा मलाल रहा है कि गुना सीट से उन्हें बेहद कम वोट मिलते हैं। यहां तक कि जब वे खुद चुनाव लड़ते हैं, तब भी गुना सीट उनका ज्यादा साथ नहीं देती। इसलिए यदि बामोरी से सिसौदिया हारे तो सिंधिया इस पूरे जिले से बाहर हो जाएंगे।

ग्वालियर जिला: अंचल का कंट्रोल यहां से पर दांव-पेंच हैं जुदा
पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल की सियासत ग्वालियर से कंट्रोल होती है। यहां अभी 6 में से 3 सीटों पर उपचुनाव है। इनमें सिंधिया समर्थक दो मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर और इमरती देवी डबरा से मैदान में हैं। तीसरी सीट ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल बाकी विधायक के रूप में भाजपा के टिकट पर हैं। कांग्रेस गेमप्लान के तहत तीनों सीट पर सिंधिया समर्थकों को हराने के लिए ताकत लगा रही है। ग्वालियर में कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, लाखन सिंह के साथ रामनिवास रावत, अशोक सिंह को कांग्रेस ने जुटा रखा है। पहले लाखन सिंह को सिंधिया समर्थक माना जाता रहा है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के पहले वे सिंधिया से दूर हो गए थे।

कांग्रेस के निशाने पर मंत्री तोमर की सीट है, क्योंकि यहां उनके लिए भितरघात के भंवर से भी जूझने की चुनौती है, जो कांग्रेस की राह आसान कर सकती है। यहां पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया की नाराजगी खत्म नहीं हुई है। पवैया को सिंधिया का विरोधी माना जाता है। पिछली बार वे तोमर से हारे थे। अब तोमर की जीत के साथ पवैया के सियासी कॅरियर पर सवालिया निशान लग जाएगा। इस कारण यहां भितरघात के दांव-पेंच ज्यादा हैं।

स्थिति: समर्थक हारे तो एक भी सीट नहीं
ग्वालियर ग्रामीण सीट भाजपा के पास है। दक्षिण पर कांग्रेस के प्रवीण पाठक और भितरवार से लाखन सिंह विधायक हैं। सिंधिया समर्थकों के हाथ से उपचुनाव वाली तीन सीटें निकल गईं तो भाजपा के पास एक सीट रहेगी। इस तरह सिंधिया के लिए यहां गेमओवर हो जाएगा।

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