70 साल से मां पर जो बोझ था, वो हटा तो देश खिल उठा

70 साल से मां पर जो बोझ था, वो हटा तो देश खिल उठा

कुमार विश्वास का जादू इंदौर पर कमाल का असर करता है। पद्य की पेचीदगियों से मुक्त, हल्की फुल्की तरन्नुम में पिरोई सीधी-सादी उनकी कविताएं इंदौर में हर उम्र के सुननेवालों की तालियां लूट ले जाती हैं। और इस सब पर भी भारी पड़ता है बतकही का उनका अंदाज़, उनका महीन हास्य। इंदौर में रविवार शाम हुए उनके कन्सर्ट में भी यही माहौल रहा। सुननेवालों को विश्वास था कि अबकी बार वो कश्मीर, 370 और पाकिस्तान पर बोले बगैर नहीं रहेंगे। और वो उनके इस विश्वास पर खरे भी उतरे। दो घंटे देरी से शुरु हुए कार्यक्रम में सवा आठ बजे विश्वास मंच पर बुलाए गए। बोले – मैं कई हज़ार किलोमीटर की यात्रा करके यहां पहुंचा हूं। लेकिन थका हुआ बिलकुल नहीं हूं। क्योंकि मेरी मां के सर पर पिछले 70 से एक बोझ था जो कश्मीर से 370 हटने के बाद उतर गया। 

इमरान खान आज सुबह से ट्विटर पर अमेरिका से अपील कर रहे हैं। करुण जी की ये पंक्तियां उनसे उधार लेकर आज हमारी तरफ से उन्हें ईद को तोहफ़ा देता हूं कि “कुछ देशभक्ति के मंत्र वहां हमने जाकर बांचे तो हैं, हम देशद्रोह के विषधर के फन पर चढ़कर नाचे तो हैं/ आतंकवाद के अंधड़ को आगे बढ़ ललकारा तो है, धीमा ही सही तमाचा पर तेरे मुंह पर मारा तो है।’ आज मैं देख रहा था एक मूर्ख ने ट्विटर पर लिखा था कि जो कभी हिटलर ने किया था वो हिंदुस्तान की सेना कर रही है। वो एक देश का हम पर आक्रमण था। और हम अपनी ज़मीन के उस ट़ुकड़े पर खड़ी उन नागफनियों को उखाड़ रहे हैं जो हम दोनों भाइयों को गले नहीं मिलने दे रही। कश्मीर में जो हुआ वो एक आदमी का निर्णय नहीं है। वो देश के 125 करोड़ लोगों का निर्णय है। 

आकाश विजयवर्गीय के बल्ले वाले मसले पर बोले – एक दिन किसी ने मुझसे कहा कि साहब आईपीएल में राजस्थान खेलता है, चेन्नई खेलता है। मालवा या इंदौर क्यों नहीं खेलता। मैंने कहा इंदौर आईपीएल खेलेगा तो सट्‌टा कौन खेलेगा? लेकिन अब तो इंदौर तो खेलना चाहिए। अब तो आपके पास भी एक बल्लेबाज़ है। फिर ग़ज़ल पढ़ी कि – “जवानी में कई ग़ज़लें अधूरी छूट जाती हैं, कई ख्वाहिश तो दिल ही दिल में पूरी छूट जाती हैं/ मैं उसके हिज्र में उससे मुकम्मल बात करता हूं, मुलाक़ातों में सब बातें अधूरी छूट जाती हैं।’ 

और फिर वो मिसरा गाया जिसका सभी को इंतजार रहता है। कोई दीवाना कहता है… पूरी गज़ल ऑडिएंस ने गाई। विश्वास बस बोले – बताओ कौन लोकसभा में जाएगा जब यहां आप जैसे सुननेवाले हैं। वहां कोई किसी की नहीं सुनता। कोई किसी को आंख मार देता है। गले पड़ जाता है। 

मोदी के मैन वर्सेस वाइल्ड शो में आने पर कहा – पिछले छह साल से जो चैनल लाओ वहां मोदी। मैंने एक दिन पूछा विपक्ष वालों से कौन सा चैनल देखते हो भाई। बोले हम डिस्कवरी देखते हैं। और सभागार में ठहाके गूंज उठते हैं। जीएसटी पर चुटकी लेते हुए कहा कि एक दिन फ्लाइट में रामदेव बाबा मिल गए। मैंने पूछा और बताओ कैसी कट रही है। बाबा बोले यार गौमूत्र पर भी जीएसटी लगा दिया। मैंने कहा हमारी कविताओं को भी कहां छोड़ा। 

राम पर बोले – आज एक चैनल पर था मैं। एंकर ने पूछा आजकल आप राम पर बहुत बोलते हैं। मैंने कहा कि राम ने अपने जीवन में कई दैत्य राक्षस मारे लेकिन किसी से संवाद नहीं किया कि सुधर जा वरना मैं तुझे मार दूंगा। लेकिन रावण नहीं समझा। जैसे हमारा पड़ोसी नहीं समझ रहा सालों से। ये पड़ोसी देश समझ नहीं रहा है कि चांद पर झंडा लगाने और झंडे पर चांद लगाने में बहुत फर्क है।’ 

कश्मीर पर कविता सुनाई 

ऋषि कश्यप की तपस्या ने तपाया है तुझे, ऋषि अगस्त्य ने हमवार बनाया है तुझे,/कभी लंदन में राबिया ने भी गाया है तुझे, बाबा बर्फ़ानी ने दरबार बनाया है तुझे/तेरी झीलों की मोहब्बत में हैं पागल बादल, मां के माथे पे दमकते हुए पावन आंचल/ तेरी सरगोशी पे क़ुर्बान तेरा पूरा वतन, मेरे कश्मीर मेरी जान, मेरे प्यारे चमन… 

तेरे गुलमर्ग पे सरताज ताज वार गया, तू वो जन्नत की जहां मीर भी दिल हार गया/ तुझसे मिलने जो गया वो तेरा होकर लौटा/ सूफियों ने तुझे पैगाम-ए-हक़ सुनाया था, शंकराचार्य ने मंदिर वहीं बनाया था/ आ गिले शिकवे करें दोनों आज मिलके दफ़न… मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन… 

एक रूमानी ग़ज़ल 

फिर मेरी याद आ रही होगी, फिर वो दीपक बुझा रही होगी/ अपने बेटे का चूम कर माथा मुझको टीका लगा रही होगी/ फिर उसी ने उसे छुआ होगा, फिर उसी से निभा रही होगी/ जिस्म चादर सा बिछ गया होगा/ रूह सिलवट हटा रही होगी।

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