भोपाल की एक घटना को लेकर मुकेश नेमा जी का व्यंग

भोपाल की एक घटना को लेकर मुकेश नेमा जी का व्यंग

मुकेश नेमा (व्यंग्य) की फेसबुक वॉल से ….

पतियों का करे क्या ! इस बाबत सोचने में भोपाली पत्नियों की कोई सानी नहीं ! भाँति भाँति के काम में आते हैं यहां के पति ! उन्हे कूटा पछाड़ा ,धोया और सुखाया जाता है और वक्त पडने पर उनके एवज़ में पैसे भी खड़े कर लिये जाते है ! नया मामला भोपाल में ही बसी एक मोहतरमा का है ! गांधी जी की भक्त इस अहिंसक महिला ने पति को हाथ लगाये बिना मार दिया ! पति को उसके मर जाने की कानों कान खबर तक नहीं होने दी उसका डैथ सर्टिफिकेट बनवाया ! बक़ायदा विधवा हुई और इस बिना पर बहुत से बैंकों से लिये गये अपने लोन माफ़ करवा लिये !


इस समझदार औरत की चर्चा थोड़ी रूक कर करते है पहले बात बैंको से लेने वाले लोन की ही कर ली जाये ! बैंक वाले लोन बाँटते वक्त गीता दर्शन से लबालब भरे रहते हैं ! यह सोचकर बाँटते हैं कि इसमें मेरा क्या है ! क्या लाये थे हम और क्या साथ ले जायेगे ! पब्लिक का धन यदि पब्लिक ही वापस ले ले ! ले ले और वापस ना करें तो इसमें बैंक का जाता क्या है ! वो हर लोन को उस माँ की तरह देखते है जिसका बेटा सरहद पर लड़ने जा रहा हो ! वो जानते हैं कि यह शायद ही लौटे ! हमारे बैंक लोगों को लोन बाँटकर नवरात्रि में पूड़ी और कद्दू की सब्ज़ी परोसते भंडारा लगाने वालों की तरह सुखी हो जाते है ! लोन बाँटना ,बाँटकर उन्हें भूल जाना और मौक़ा मिलते ही उन्हें माफ़ कर देना पुण्य कार्य है इस लिहाज़ से हमारे सारे बैंकरो का स्वर्ग जाना तय है !
आईये एक बार फिर भोपाल की इन होनहार मोहतरमा की तरफ़ रूख करे ! इस समझदार औरत ने बैंक में विधवा होने बाबत फ़र्ज़ी काग़ज़ात पेश किये और लोन माफ़ करवा लिये ! इस नेक काम में उसके पति की हैसियत रखने वाले एक जालसाज़ बाबा ने उसकी मदद की ! मेरे ख़्याल से इस औरत के असली वाले पति को बाबा का एहसानमंद होना चाहिये ! बाबा चाहते तो अपनी इस भक्त को सचमुच में विधवा बना सकते थे ! पर उन्होंने ऐसा नहीं किया ये अपने आप में बड़ी बात है !
हमारे यहाँ मौजूद अधिकतर बाबा अपनी भक्तनियो के प्रति भारी सहृदय रहते है ! बहुत से तो बाबा बनते ही इस चक्कर में है कि वो सुंदर महिलाओ की मदद कर सके ! बाबा बनना स्वर्ग के रास्ते पर चल पडने की तैयारी है ! मरने से पहले स्वर्ग मिलता नहीं इसलिये बहुत से बाबा सुंदर चेलियो की सहायता कर जीते जी स्वर्गवासी हो लेते है !
अगली बात इस ज़रूरत मंद औरत के पति की आपत्ति बाबत है ! उसे शायद ज़िंदा रहते हुये मर जाना रास आया नहीं ! उसने एतराज़ जताया इस पर और उसकी अहिंसक पत्नी और वो नेकदिल बाबा पकड़े गये ! उसका इस मामूली बात पर उखड़ जाना सिरे से ग़लत है ! जिस आदमी को उसकी बीबी फ़क़त अस्सी हज़ार के लिये मरा डिक्लेयर कर दें उसे तो वैसे भी खुद को मरा मान लेना चाहिये ! बीबी ने यह सब करते हुये उसे अस्सी हज़ार रूपयो से तोलकर देखा ही होगा अब आप हल्के रह गये तो इसमें किसकी गलती है ! उसे चुप रह कर अपनी बीबी की ख़ुशियों में आड़े आने से बचना चाहिये था !
ख़ैर ! अब वो मददगार बाबा और उसकी अहिंसक शिष्या पुलिस की गिरफ़्त में है ! जेल भेज दिये गये है ये दोनों ! हम उम्मीद करते हैं जेल में और भी काबिल लोगों से सत्संग होगा इनका ! ये और निखरेगे और आगे चलकर और भी बैंकों और पतियों का उद्धार कर सकेगे !

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