कहो कैसे चूक गये पुलिस कप्तान साहब?

कहो कैसे चूक गये पुलिस कप्तान साहब?

श्रीगोपाल गुप्ता

पीले सोने (सरसों) की बंपर खेती और सर्दियों की मेवा गजक के विशाल उत्पादन के लिए देश-दुनिया में बिख्यात चंबल के बेहड़ों का सरताज मुरैना जिला आज एक बार पुनः दिल-दहला देने वाली घटना का शिकार होकर शर्मसार है ! शर्म भी ऐसी की तमाम पुलिसिया कार्यवाहियों के बावजूद अबैध और मौत के सौदागर शराब माफिया ने चबंल की गोद में मौजूद सुमावली व बागचीनी थानान्तगर्गत मानपुर, पृथ्वी, छैरा व पाहवली गांव के 11 निर्दोष लोगों की जान ले ली और दर्जन भर लोगों को ज़िंदगी भर घसीट-घसीटकर जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया! दरअसल बीते रविवार शाम को इन गांवों के करीब दो दर्जन लोगों ने पुलिस और आबकारी विभाग की लापरवाही व मिलीभगत के कारण गांव में शराब माफियाओं द्वारा तैयार की जाने वाली कच्ची देशी शराब का सेवन किया था! इसके तत्काल बाद एक युवक की तबियत ज्यादा खराब होने पर उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल मुरैना लाया गया, जहां दौराने इलाज उसकी मौत हो गई, इसे स्वाभाविक मौत मानकर सोमवार को उसकी अंत्येष्टी कर दी गई ! मगर इसके बाद जैसे भूचाल आ गया जब चारो गांव में यह कच्ची व जहरीली शराब पीने वालों की हालत बदतर होने लगी और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लाने का सिलसिला शुरु हो गया! यहां पर दर्जन भर लोगों की हालत अत्याधिक नाजुक होने पर डाक्टरों ने ग्वालियर रिफर किया ,मगर कई मरीज ग्वालियर पहुंच ही नहीं पाये उन्होने रास्ते में ही दम तोड़ दिया! इधर मुरैना जिला अस्पताल में भी घायलों के दम तोड़ने का सिलसिला शुरु हो गया, हालातों के खौफ़नाक व रुद्र रुप ले लेने से संभलते-संभालते सोमवार को 10 लोग असमय काल के गाल में समा गये! घायलों के मरने का सिलसिला आज मंगलवार को सुबह भी जारी रहा जब एक और शख्स ने जिला अस्पताल में ही जैरे इलाज दम तोड़ दिया और घायलों की स्थिति को देखते हुए संभावना यही है कि मौतौं का सिलसिला आगे भी बढ़ सकता है? बहुत ही दिल-दहलाने वाली बात यह है कि इस बहसी कांड में बली चढ़ने वाले दो सगे भाई बंटी गुर्जर ने जहां मुरैना जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया तो वहीं उसके भाई जितेन्द्र गुर्जर और इन दोनों के सगे चाचा रामनिवास ने ग्वालियर अस्पताल में अंतिम सांस ली! इस कायरना और शर्मनाक कांड से जहां चंबल व मुरैना सहित समूचा मप्र शर्मसार है तो वहीं चंबल क्षेत्र में हुई इन दर्द बिदारक मौतों से सन्नाटा पसर गया है! सन्नाटा इसलिये और ज्यादा पसर गया है कि जब पुराने समय से ही अति संवेदन शील चंबल संभाग के मुख्यालय मुरैना जिले का निगाहबीन पुलिस कप्तान तेज-तर्रार और अच्छी सोच का 2014 बैंच का नौजवान आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया तैनात हो, तब यह कलंकित घटना कैसे घटित हुई? जबकि अति कोरोना काल के संकट के दौरान अपनी तैनाती जून 2020 से ही पुलिस कप्तान के निशाने पर अबैध शराब के माफियाओं पर लगाम कसना ही रहा हो तब फिर क्यूं और कैसे? इसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है कि टीकमगढ़ जिले में सफल रहने के पुलिस अधीक्षक मुरैना का कार्यभार संभालते ही सुजानिया शराब के माफियाओं पर कहर बनकर टूटे जिसका परिणाम है कि अगस्त से शुरु हुआ शराब माफियाओं को नेस्ताबूद करने का सिलसिला अभी तक जारी है! जिसका परिणाम है कि करोड़ों रुपयों की अबैध शराब और शराब बनाने का कच्चा सामान उनके नेतृत्व मे जिला पुलिस ने जप्त कर दर्जनों गुनहगारों को जेल के सींखचों के अन्दर कर दिया है और यह सिलसिला जारी है! सच यह भी है कि अपनी अत्तिरिक्त पुलिस अधीक्षक की तैनाती के अनुभवों के आधार पर उनके इस अल्प कार्यकाल में जिले में अपराधों के ग्राफ में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है! मगर इस दरिदंगी पूर्ण शर्मनाक कांड से वही सवाल मोजू है कि कहो कैसे चूक गये पुलिस कप्तान साहब? इसका चिंतन उन्हें करना पड़ेगा कि क्या इस दर्दनाक कांड की मुख्य वजह उनका जरुरत से ज्यादा अपने अधिनस्थों पर विस्वास रहा है? जो छाटे-मोटे घटनाक्रम को बड़ा से बड़ा दिखाते हुए प्रेस-कानफ्रेंसों में अपनी-अपनी पीठ थपाथपाते रहे और अपने थानान्तगर्गत मौत का सामान तैयार कर रहे मौत के सौदागरों के सिरों पर हाथ रखते रहे? क्योंकि गांव में बन रही अबैध शराब की जानकारी उन्हें न हो? ऐसा मानने की कोई जायज वजह भी तो नही है, क्योंकि परिणाम सामने है कि अबैध शराब के माफियाओं ने एक दर्जन जिंदगियों को असमय छीन लिया!

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