कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के साथ सोनिया गांधी की बैठक, पांच सीएम पहुंचे

कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के साथ सोनिया गांधी की बैठक, पांच सीएम पहुंचे

मध्यप्रदेश, राजस्थान और पंजाब में कांग्रेस नेताओं के बीच आपसी टकराव की खबरों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं प्रभारियों के साथ बैठक शुक्रवार शाम आरंभ हो गई। सोनिया के आवास पर हो रही इस बैठक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी भाग ले रहे रहे हैं। बैठक के बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस शासित सभी राज्य सरकारें क्या कर रही हैं और लोगों के लिए क्या किया जा रहा है, इसपर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की भागीदारी को कैसे बढ़ाया जाए इसपर भी चर्चा हुई।

बैठक में मध्यप्रदेश के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया, राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, पंजाब की प्रभारी आशा कुमारी, प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पुनिया भी शामिल हैं। सोनिया पार्टी शासित मुख्यमंत्रियों एवं प्रभारियों के साथ उस वक्त बैठक कर रही हैं जब इनमें से अधिकतर राज्यों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी टकराव की खबरें लगातार आ रही हैं।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के धड़ों के बीच प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान चल रही है तो राजस्थान में मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने की बात लंबे समय से कही जा रही है। उसी तरह के पंजाब में अमरिंदर और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच भी टकराव की खबरें हाल में आई थीं। सिद्धू ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

माना जा रहा है कि इस बैठक में सोनिया कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से शासन व्यवस्था और पार्टी संगठन को लेकर बातचीत करेंगी। वैसे, सोनिया ने बृहस्पतिवार को पार्टी महासचिवों-प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में दो टूक कहा कि पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारों को संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी शासन की मिसाल पेश करनी होगी तथा घोषणापत्र में किए वादों को पूरा करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम जनता का विश्वास खो देंगे और परिणाम विपरीत होंगे।

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