जीवन रंग हज़ार मिलें

जीवन रंग हज़ार मिलें

उम्मीदों की इस कश्ती को,
चाहें जितनी धार मिलें।
तभी पार होता है दरिया,
नाविक से पतवार मिले।

जब निकलोगे लड़ने को,
जीवन जंग हजार मिलें।
टूट नहीं जाना तुम किंचित,
बार बार ग़र हार मिले।

एक अकेला चलता चल,
ना दूजे की दरकार मिले।
एक बीज ही पतझड़ का,
है सावन में गुलजार मिले।

जीवन के इस क्रम में तो,
दुःख का पारावार मिले।
गीत अगर गा लोगे ये,
तो खोए रंग हजार मिलें।

यौवन की ऊर्जा थे तुम,
यह जीवन बारंबार मिले।
लांघ गए होते उस पल को,
उन्मुक्त गगन अपार मिले।

बाल हृदय, तुम सुशांत थे,
दुनिया में बस बाजार मिलें।
बीच सफर ही चले गए क्यों
नित रोए हम बेजार मिले।

स्मित वदन सुशांत को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि!

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