सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ किया है कि तीन तलाक के आरोपी पति को अदालत अग्रिम जमानत दे सकती है। कोर्ट ने ये फैसला केरल के एक दंपत्ति के मामले में सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ किया है कि तीन तलाक के आरोपी पति को अदालत अग्रिम जमानत दे सकती है। कोर्ट ने ये फैसला केरल के एक दंपत्ति के मामले में सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ किया है कि तीन तलाक के आरोपी पति को अदालत अग्रिम जमानत दे सकती है। कोर्ट ने ये फैसला केरल के एक दंपत्ति के मामले में सुनाया है।
दरअसल, 2019 में ट्रिपल तलाक कानून को गैर जमानती बनाया गया था और इससे ये समझा जाता था कि अगर कोई मुस्लिम महिला या उसके रिश्तेदार किसी व्यक्ति पर तीन तलाक देने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराते हैं तो उस व्यक्ति को सीधा जेल भेजा जाएगा।
उसे अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी, यानी उस आरोपी को पुलिस में सरेंडर करना होगा, जेल जाना होगा और फिर अदालत महिला का पक्ष सुनने के बाद ये तय करेगा कि आरोपी पति को ज़मानत दी जाएगी या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि अग्रिम जमानत के लिए सीआरपीसी की धारा 438 ट्रिपल तलाक अधिनियम के तहत वर्जित नहीं है। यह प्रक्रिया केवल ये बताती है कि ट्रिपल तलाक अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत देने से पहले पीड़ित महिला को मजिस्ट्रेट द्वारा सुना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक ऐसे मामले में आया है, जिसमें एक महिला ने पति और सास के खिलाफ घर से बाहर निकालने और उसे ट्रिपल तलाक देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।

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